बद्री भगत वेद विद्यालय, मंडोली मंदिर

झंडेवाला मंदिर का ही एक अन्य प्रकल्प दिल्ली की सीमा पर स्थित मंडोली ग्राम में स्थित देवी मंदिर है। यह मंदिर झंडेवाला मंदिर से लगभग २२ किलोमीटर दूरी पर वजीराबाद से गाजियाबाद जाने वाले मार्ग पर स्थित है। प्राचीन समय में वजीराबाद मार्ग के किनारे मंडोली व् सबोली दो छोटे गांव हुआ करते थे। वर्तमान समय के सबोली मोड के बाद घना विशाल जंगल प्रारंभ होता था। जो काफी दूर तक फैला था। इसी मार्ग पर जहां वर्तमान समय में देवी माँ का मंदिर स्थित है वहां पर रेत का ऊँचा टीला हुआ करता था। उस टीले में भरा हुआ पानी का कच्चा तालाब था। तालाब के पूर्वी किनारे पर विशाल बरगद के दो वृक्ष थे। इसी रेत के टीले के किनारे एक नहर बहती थी जो उत्तर प्रदेश गाजियाबाद के इसरौली गांव से निकलकर शाहदरा तक जाती थी। आसपास के गांव के ग्वाले पशुओं को चराते हुए इस तालाब पर अपने पशुओं को पानी पिलाते थे और इन्हीं विशाल बरगदों कि छाया में विश्राम करते थे। जंगल होने के कारण अनेको प्रकार के जंगली जानवर वहां पानी पीने आते थे। सभी ग्वाले मिलकर वर्ष में एक बार जून मास में यज्ञ किया करते थे तथा गायों के दूध कि खीर बनाकर भंडारा करते थे। इस इतिहास के ग्वाह दो ग्वाले अभी भी जीवित हैं। यहां के आसपास के गांव का मुख्य बाजार शाहदरा हुआ करता था। इसी स्थान पर बादशाही ईटों का एक पक्का कुँआ है जो कि अभी भी मंदिर कि जमीन में स्थित हैं। राहगीर यही पर रूककर पानी पिया करते थे और विश्राम करते थे। १९४७ देश विभाजन के पश्चात श्री मेलाराम जी का परिवार यहां पर पहुँचा और ईट बनाने का भट्टा लगाया। जिस कारण ऊँचे टीले की मिट्टी ईट बनाने के काम आयी। इन्हीं श्री मेलाराम जी के सुपुत्र श्री जसवंत राय जी अरोड़ा ने अपनी भूमि का एक भाग मंदिर समिति को दान स्वरुप भेंट कर दिया। स्थानीय लोगों कि मांग पर मंदिर समिति ने उस स्थान पर एक भव्य मंदिर के निर्माण का कार्य का निर्णय किया। जिस स्थान पर कच्चा तालाब हुआ करता था उस स्थान पर वर्तमान में देवी माँ का मंदिर स्थित है जिसका निर्माण कार्य ०१ जनवरी १९९५ से प्रारंभ हुआ तथा अक्षय तृतीया, सवत् २०६३ बुधवार ३ मई २००६ को देवताओं की प्राण प्रतिष्ठा हुई।


धीरें - धीरें आज मंदिर इस क्षेत्र की धार्मिक गतिविधियों के साथ - साथ अनेक सेवा कार्यों का एक प्रमुख केंद्र बन चुका है। वर्ष में आने वाले दो नवरात्रों के अतिरिक्त लगभग सभी प्रमुख त्यौहारों एवं उत्सवों का आयोजन यहां होता है एवं हजारों की संख्य़ा में भक्त यहां उपस्थित होते हैं।


मंदिर परिसर में वर्तमान में एक वेद विद्यालय, संस्कृत संवादशाला, एलोपैथिक डिस्पेंसरी, महिला स्वास्थ्य जांच केंद्र, सिलाई केंद्र आदि सेवा कार्य निःशुल्क किये जा रहे हैं। समय - समय पर भागवत कथा एवं संत महात्माओं के प्रवचन भी आयोजित किए जाते हैं।