झण्डेवाला देवी मन्दिर मण्डोली

मण्डोली यमुना पार दिल्ली की सीमा से लगे हुए नन्द नगरी से सटा एक गांव है जो उत्तर प्रदेश की सीमा में पड़ता है, कुछ समय पहले तक यह सारा क्षेत्र विकास की दृष्टि से बहुत ही पिछड़ा हुआ था। आस पास के क्षेत्र में कहीं भी कोई बड़ा मन्दिर या पूजा स्थल नहीं था। वहा¡ के एक सम्पन्न जमींदार परिवार ने कुछ जमीन झण्डेवाला मन्दिर समिति को दान में दी। जिसपर समिति ने एक भव्य मन्दिर का निर्माण करने का निर्णय लिया। और कुछ ही समय में यह मन्दिर वनकर तैयार हो गया और फिर क्षेत्र के लोगों के सहयोग मई वुधवार अक्षय तृतीया बर्ष 2006 में मन्दिर की प्राण प्रतिष्ठा हुई। धीरे-धीरे आज यह मन्दिर उस क्षेत्र की धार्मिक गतिविधियाँ के साथ-अनेक सेवा कार्यो का प्रमुख केन्द्र बन चुका है। बर्ष में आने वाले 2 नवरात्रों के अतिरिक्त लगभग सभी प्रमुख त्यौहार एवं उत्सवों का आयोजन यहा¡ होता है एवं हजारो की संख्या में भक्त यहाँ उपस्थित होते हैं।


वेद विद्यालय मण्डोली

भारतीय ज्ञान के इतिहास में वेदों का बहुत महत्व रहा है। परन्तु दुदैव से इस ज्ञान के भण्डार को हम विस्मृत करते जा रहे हैं। अपनी इस अमूल्य धरोहर को भावी पीढियों के लिए सुरक्षित और संरक्षित करने हेतु झण्डेवाला मन्दिर समिति ने जुलाई-2008 में वेद विद्यालय की मण्डोली में स्थापना की , आज इस विद्यालय में देश के विभिन्न क्षेत्रों से आये हुए लगभग 94 बालक वेदों की शिक्षा विद्वान आचार्यों द्वारा ग्रहण कर रहे हैं। इस सबका सम्पूर्ण व्यय मन्दिर समिति वहन कर रही है।

प्रत्येक वर्ष प्रयाग में लगने वाले माघ-मेले में भारत के अनेकों वेद विद्यालयों का सम्मेलन आयोजित होता है, जिसमें बद्री भगत झण्डेवाला वेद विद्यालय के वेद पाठी बटुकों ने अनेक पुरस्कार प्राप्त किये हैं।

वेद विद्यालय में आने वाले बच्चों की निरन्तर बढ़ती संख्या को ध्यान में रखते हुए मन्दिर समिति ने वेद विद्यालय को प्रोन्नत करके महाविद्यालय का स्वरूप देने की योजना बनाई है। जिसके लिये शीध्र ही भवन निर्माण का कार्य प्रारम्भ करने की योजना है।


संस्कृत संवाद शाला मण्डोली

देव भाषा संस्कृत के प्रचार-प्रसार और राष्ट के प्राचीनतम ज्ञान के उपयोग हेतु संस्कृत भाषा को बोल चाल की सरल भाषा बनाने के लिए बद्री भगत झण्डेवाला मन्दिर समिति की ओर से मई मास-1999 से मंडोली मन्दिर परिसर में संस्कृत संवाद शाला का शुभारम्भ किया गया। इस संवाद शाला में 2 सप्ताह का संस्कृत सम्भाषण का मान्यता प्राप्त पाठ्यक्रम चलाया जा रहा है। अब तक 325 संस्कृत संभाषण शिविर आयोजित किये जा चुके हैं । जिसमें भारत के भिन्न-भिन्न प्रदेशों के अतिरिक्त आस्टªेलिया, ब्राजील, भूटान, चीन, रूस, इन्डोनेशिया, मलेशिया, एवं नेपाल से आये अनेकों शिक्षार्थी व्यावहारिक संस्कृत का ज्ञान प्राप्त कर चुके है । इस संवाद शाला की सभी कक्षायें नि:शुल्क आयोजित की जाती हैं।


महिला सिलाई प्रशिक्षण केन्द्र मण्डोली

बद्री भगत झण्डेवाला मन्दिर समिति ने अपने सामाजिक दायित्वों का निर्वहन करते हुए मण्डोली मन्दिर के आस पास रहने वाले गरीब परिवारों की कन्याओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए नि:शुल्क सिलाई केन्द्र की स्थापना 20 जनवरी 2010 में हुई है। इस केन्द्र में मान्यता प्राप्त डिप्लोमा एवं नान डिप्लोमा दोनो प्रकार के पाठ्यक्रम निशुल्क चलाये जाते हैं। अब तक इस केन्द्र से सैकड़ो कन्यायें प्रशिक्षण लेकर लाभ उठा रही हैं।


ऐलोपैथिक डिस्पैन्सरी मण्डोली

मण्डोली एवं आस पास के क्षेत्रों के गरीब लोगों की स्वास्थ्य सम्बन्धी आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए मन्दिर समिति की ओर से मन्दिर परिसर में ही ऐलोपैथिक डिस्पैन्सरी की व्यवस्था की गयी है जिसमें प्रशिक्षित डॉक्टरों द्वारा मरीजों का उपचार किया जाता है । इसके अतिरिक्त मन्दिर परिसर में ही महिलाओं के स्वास्थ्य की अलग से जांच और उपचार की व्यवस्था की गय है। जिसमें E.C.G. की सुविधा भी उपलब्ध है। चिकित्सा सम्बन्धी सभी सुविधायें नि:शुल्क है। इनसे प्रति वर्ष हजारों लोग लाभान्वित हो रहे हैं।


होम्योपैथिक डिस्पैन्सरी

भक्तों के अनुरोध पर एवं क्षेत्र के निवासियों के लाभ के लिए मण्डोली स्थित मंदिर में होम्योपैथिक डिस्पैन्सरी की भी व्यवस्था की गई है जिसकी सेवाएं सप्ताह में ३ दिन उपलब्ध रहती है।


ऐलोपैथिक डिस्पैन्सरी ताहिरपुर

दिल्ली के यमुना पार क्षेत्र में ताहिरपुर नामक स्थान पर सरकार द्वारा कुष्ठ रोगियों हेतु बसाई गई कालोनी के निवासियों के स्वास्थ्य सम्बन्धी आवश्यकताओं के लिये बद्री भगत झण्डेवाला सोसाइटी द्वारा ऐलोपैथिक डिस्पैन्सरी का संचालन वर्ष 2011 से किया जा रहा है। यहॉ कुष्ठ रोगियों के लिये उपलब्ध सभी सेवायें नि:शुल्क है ।